पानीपत का कपड़ा उद्योग देशभर में चमक रहा, अब बनेगा अंतरराष्ट्रीय टेक्सटाइल संस्थानपानीपत का कपड़ा उद्योग देशभर में चमक रहा, अब बनेगा अंतरराष्ट्रीय टेक्सटाइल संस्थान

चंडीगढ़, 21 जनवरी। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि पानीपत बुनकरों की और ऐतिहासिक नगरी है जहां का कपड़ा उद्योग हरियाणा के साथ-साथ पूरे भारत में नाम रौशन कर रहा है। पानीपत आज तेज गति से खाद्य प्रसंस्करण केन्द्र के रूप में भी तेजी से उभर रहा है। इसी को देखते हुए विभिन्न उद्योग संगठनों की मांग पर पानीपत में अंतरराष्ट्रीय स्तर का टेक्सटाइल संस्थान बनाया जाएगा, जिसके लिए 10 एकड़ जमीन उपलब्ध करवाई जाएगी। इस संस्थान में अंतर्राष्ट्रीय स्तर के मानकों पर तकनीकी दक्षता उपलब्ध करवाई जाएगी।

मुख्यमंत्री बुधवार को पानीपत में आयोजित पानीपत, सोनीपत, और करनाल में टेक्सटाइल, फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्री और विभिन्न उद्योगों से जुड़े प्रतिनिधियों से बजट पूर्व परामर्श बैठक में उपस्थित उद्योगपतियों को सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि विभिन्न उद्योग संगठनों की मांग पर हरियाणा आत्मनिर्भर टेक्सटाइल पॉलिसी की अवधि को एक वर्ष के लिए बढ़ाकर 18 दिसंबर, 2026 तक कर दिया है।

श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि आज फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्री पूरे प्रदेश में किसानों और उपभोक्ताओं के बीच एक मजबूत सेतु का कार्य कर रही है। किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य दिलाने, उन्हें आधुनिक तकनीक से जोड़ने और कृषि को लाभकारी व्यवसाय बनाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के फार्म टू फाइबर, फाइबर टू फैक्ट्री, फैक्ट्री टू फैशन और फैशन टू फोर्न फाइव-एफ के मंत्र का भी जिक्र किया और कहा कि हरियाणा में भी इसी फाइव-एफ विजन को साकार करने के लिए प्रतिबद्ध है। पूंजीगत निवेश सब्सिडी के तहत अब मामलों की संख्या पर कोई सीमा नहीं रहेगी। अब जितने भी योग्य उद्यमी आएंगे, सरकार उन सबकी मदद करेगी।

उन्होंने कहा कि हरियाणा आत्मनिर्भर टेक्सटाइल पॉलिसी के तहत 354 आवेदन प्राप्त हुए हैं। इनके लिए 367 करोड़ रुपये की ग्रांट स्वीकृत की जा चुकी है। यह पॉलिसी सभी उद्यमियों के विश्वास का प्रतीक है। आज दुनिया केमिकल-मुक्त और प्राकृतिक रंगों वाले कपड़ों की मांग कर रही है। उन्होंने विश्वास व्यक्त करते हुए कहा कि जिला पानीपत इस दिशा में ग्लोबल लीडर बन सकता है और यहां के लोग अब केवल पारंपरिक काम नहीं कर रहे, बल्कि वेस्ट टू वेल्थ और पेट टू फाइबर तथा एंटी बैक्टीरियल टॉवल्स जैसे नए प्रयोग कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने सभी निर्यातकों से आग्रह किया कि केवल पारंपरिक माल नहीं बेचना है, हमें विश्व बाजार की संस्कृति और मांग को समझना है। पानीपत का कपड़ा जब यूरोप या अमेरिका जाए, तो उस पर लिखा मेड इन इंडिया और मेड इन हरियाणा दुनिया के लिए गुणवत्ता की गारंटी बन जाए। इसके लिए, मेडिकल टेक्सटाइल और टेक्निकल टेक्सटाइल जैसे नए क्षेत्रों में रिसर्च करनी होगी। इसके लिए बजट में विशेष पर्याप्त प्रावधान किए जा रहे हैं। हरियाणा में नेशनल टेक्निकल टेक्सटाइल मिशन के साथ मिलकर नई मशीनरी और ट्रेनिंग के लिए सब्सिडी दे रहे हैं। बजट 2025-26 में प्रदेश सरकार ने महिलाओं के कौशल विकास के लिए विशेष फंड का प्रावधान किया था ताकि महिला श्रमिक केवल मजदूर न रहें, बल्कि वे डिजाइनिंग और मैनेजमेंट में भी आगे आएं। पिछले 10 वर्षों में टेक्सटाइल में एफ.डी.आई. दोगुना हुआ है। भविष्य में पानीपत, गुरुग्राम और फरीदाबाद द्वारा मिलकर हरियाणा को ग्लोबल एक्सपोर्ट हब बनाने की दिशा में काम किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि आज उच्च कोटि के खाद्य पदार्थों की मांग निरंतर बढ़ रही है। इस मांग को पूरा करने के लिए खाद्य प्रसंस्करण उद्योग को अधिक व्यापक बनाने की जरूरत है। आज देश में फूड प्रोसेसिंग उद्योग बढ़कर लगभग 35 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। यह वर्ष 2032 तक बढ़कर लगभग 73 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच जाएगा। इसलिए, इस उद्योग में निवेश व विकास की व्यापक संभावनाएं हैं। हरियाणा में 28 हजार से अधिक फूड प्रोसेसिंग यूनिट लग चुकी हैं। उन्होंने कहा कि हरियाणा में इस इंडस्ट्री के लिए अपार संभावनाएं हैं। प्रदेश सरकार ने फूड प्रोसेसिंग व्यवसाय को पूंजी निवेश सब्सिडी प्रदान करने के लिए 12 जून, 2019 को चार प्रमुख बुनियादी ढांचा योजनाएं अधिसूचित की हैं। इनमें पहली योजना में फूड प्रोसेसिंग इकाइयों की स्थापना, विस्तार व विविधीकरण के लिए सब्सिडी की व्यवस्था की गई है। इसके तहत परियोजना लागत पर 25 प्रतिशत की पूंजी निवेश सब्सिडी प्रदान की जाती है। यह सब्सिडी ए व बी ब्लॉक में 50 लाख रुपये और सी व डी ब्लॉक में 1 करोड़ रुपये मिलती है। दूसरी योजना, बैकवर्ड और फॉरवर्ड लिंकेज योजना है। इसके तहत परियोजना लागत पर 50 प्रतिशत की पूंजी निवेश सब्सिडी प्रदान की जाती है। यह सब्सिडी ए व बी ब्लॉक में 2 करोड़ 50 लाख रुपये तक तथा सी व डी ब्लॉक में 3 करोड 50 लाख रुपये तक दी जाती है।

 रेफर व्हीकल और किसी अन्य चल बुनियादी ढांचे के लिए यह सहायता पूंजी निवेश का 50 प्रतिशत है, जो कि प्रत्येक परियोजना के लिए 50 लाख रुपये तक है। तीसरी योजना में, एकीकृत कोल्ड चेन एवं वैल्यू एडिशन इंफ्रास्ट्रक्चर पर सब्सिडी दी जाती है। इसके तहत परियोजना लागत पर 35 प्रतिशत से लेकर 45 प्रतिशत तक सब्सिडी प्रदान की जाती है। यह सब्सिडी भंडारण के बुनियादी ढांचे, पैकेजिंग हाउस, परिवहन के बुनियादी ढांचे, मूल्य संवर्धन और प्रसंस्करण बुनियादी ढांचे के लिए 5 करोड़ रुपये तक हो सकती है। चौथी योजना, एकीकृत मिनी फूड पार्क योजना है। इसके तहत परियोजना लागत पर 50 प्रतिशत की दर से पूंजी निवेश सब्सिडी प्रदान की जाती है। यह सब्सिडी केवल सी और डी श्रेणी के ब्लॉक में 10 करोड़ रुपये तक दी जाती है। आज जब हम विकसित भारत-विकसित हरियाणा के विजन को साकार करने के लिए गति से बढ़ रहे हैं, तो उसकी असली ताकत इंडस्ट्रियल सेक्टरल एसोसिएशनों में छिपी है जो नीति और जमीनी हकीकत के बीच सेतु हैं। इन सभी की समस्याओं का समाधान सरकार की प्राथमिकता है और इन द्वारा दिए गए सुझाव सरकार के मार्गदर्शक का काम करेंगें।

मुख्यमंत्री ने आश्वस्त करते हुए कहा कि सभी सुझावों पर गंभीरता के साथ काम किया जाएगा। उन्होंने उपस्थित लोगों से अनुरोध किया कि जब विधानसभा में बजट 2026-27 कि प्रस्तुति हो तो वे उसे अवश्य सुनें। जिन के बहुमूल्य सुझाव बजट 2026-27 में शामिल किए जाएंगे, उन सभी को सरकार की ओर से विधानसभा की कार्यवाही देखने का विशेष निमंत्रण भेजा जाएगा।

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